अंतर मतभेद (भारत में विश्व धरोहर स्थलों की खोज हेतु सार्वभौमिक डिजाइन)

यूनिवर्सल डिजाइन भारत में एक उभरती हुई धारणा है जो लोकतंत्र की जड़ों, और आत्म निर्भरता पर आधारित है। सामाजिक रूप में अत्‍यंत गहराई तक इसका समर्थन है। संस्थान ने अपने प्राथमिक शैक्षिक क्षेत्रों को अवधारणा के रूप में अपना कर मानव केंद्रित अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया है। सीएचसीआर नियमित रूप से देश में सार्वभौमिक डिजाइन को पढ़ाने के लिये अभिनव तरीके की खोज करता है। केन्द्र का उद्‌देश्य कल्पनाशील डिजाइन समाधान विकसित करना है।
पुस्तक प्रस्तुति की एक ऐसी पहल जिसे राष्ट्रीय छात्र डिजाइन प्रतियोगिता कहा गया है भारत में वैश्विक धरोहर स्थलों की खोज हेतु सार्वभौमिक रूप से डिजाइन की गई है। विश्व के धरोहर स्थलों में भौतिक वातावरण के सार्वभौमिक प्रयोज्य एवं उनकी प्रमाणिकता और अखण्डता को बनाए रखने के उद्‌देश्य से कल्पनाशील डिजाइन समाधान विकसित किया गया है। पुस्तक में चयनित डिजाइन भी सम्मिलित किये गये हैं। प्रतियोगिता के अंत में खुलने वाले परिणाम जो कि सार्वभौमिक डिजाइन शिक्षा के लिये उदाहरण के रूप में जारी किये गए हैं इससे सार्वभौमिक डिजाइन में शामिल छात्रों को लाभ होगा, सार्वभौमिक डिजाइन शिक्षक में वे सभी पेशेवर जो स्थलों पर कार्य करते हैं, शामिल हैं । पुस्तक का प्राक्कथन प्रो. आबीर मलिक जो कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समावेशी डिजाइन कार्य के लिये प्रशंसित है ने लिखा है। भारतीय सार्वभौमिक डिजाइन का विकास यूनिवर्सल डिजाइन (एन.सी. स्टेट यूनिवर्सिटी यूएसए) एवं भारतीय विशेषज्ञों की एक टीम के नेतृत्व से क्रियान्वित होगा।


2035 तक भोपाल में अल्प कार्बन सोसायटी का विश्लेषण

समूचे विश्‍व में, शहर ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन के लिये प्रमुख योगदान कर रहे हैं एवं यही भारतीय शहरों के लिये एक सत्य है। पर्यावरण के अनुकूल विकास की खोज में, विश्‍व के विविध भागों से बहुत से शहरों ने जलवायु परिवर्तन के न्यूनीकरण एवं डिजाइन को लागू करने एवं अनुकूल रणनीतियां बनाने का प्रयास किया है। अल्प कार्बन का विकास इस दिशा में पहला कदम है।
शहरी स्तर पर अल्प कार्बन सोसायटी अध्ययन विकास का एक मंच है जो शोधकर्ताओं, हितधारकों और नीति निर्माताओं के साथ बातचीत के लिये अपने ज्ञान को एकीकृत कर और अल्प कार्बन सोसायटी की ओर संक्रमण के लिये प्रासंगिक परिदृश्‍यों का निर्माण करता है। अल्प कार्बन सोयायटी का रोड मानचित्र तैयार कर विकास गतिविधियों के एकीकरण में मदद होगी, शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर विनियोग को प्राथमिकता एवं विकास की प्राथमिकता और कार्यकुशलता में सुधार हेतु अभिनव प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन देना है। एक अन्य महत्वपूर्ण योगदान व्यवहार और जीवन शैली में परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिये किया जायेगा।


स्पैन्ड्रल

SPANDREL का विस्तारित रूप - एस.पी.ए. की एक पत्रिकाः जीने योग्य वातावरण के अनुसंधान में नए आयाम। जिसे योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल द्वारा प्रकाशित किया गया है।
विद्यालय की शैक्षणिक प्रणाली के आधार पर अनुसंधान एवं जांच के माध्यम से सशक्त अभिकल्पन समाधान तैयार किया गया है। यह पत्रिका भविष्य में विविध अनुशासनों के सीमांत अनुसंधान की आशा करती है जो कि वातावरण के प्रति हमारी समझ को और अधिक समृद्ध करेगी और बड़ी प्रभावपूर्ण एवं संवेदनशील मदद मिलेगी जैसे पेशेवरों ने भरोसे के साथ भविष्य की आकृति को बनाने की जिम्मेवारी ली है।
संक्षिप्त SPANDREL इतिहास के महत्वपूर्ण वास्तुशिल्प तत्वों का प्रतीक है। इसे निम्न परिभाषा द्वारा व्यक्त कर सकते हैं ''दो वृत्त या एक वृत्त एवं एक आयत के मध्य का स्थान। स्पैन्ड्रल के निर्माण की संरचनात्मक स्थिरता में एक धनुषाकार प्रणाली में खुलने की महत्वपूर्ण भूमिका है। हॉलाकि ऐतिहासिक दृष्टि से शब्द स्पैन्ड्रल उसके कार्यात्मक मूल से विकसित किया गया है और एक सुविधा तत्व अक्सर अमीर अलंकरण के साथ चित्रित होने के लिये जुड़ गया है। तत्व अपने विनम्र मूल से परे एक मार्ग पर चला गया और विविध निर्माण कार्य में विशेष रूप से देखा गया है। जैसे स्पैन्ड्रल खुलने पर दीर्धावधि गुम्बद की तरह त्रिआयामी स्पैन्ड्रल इनपेन्डक्टिव के रूप में प्रकट होता है।
पत्रिका की उम्मीद है कि स्पैन्ड्रल के प्रगति तत्व विकास एवं महत्व के प्रतीक हैं एवं अनुसंधान और वातावरण की डिजाइन के दायरे में दौड़ने के लिए अन्वेषणों की एक यात्रा के माध्यम से शुरूआत का विकास हो रहा है।

ग्लोबल स्टूडियो

ग्लोबल स्टूडियो योजना एवं वास्तुकला विद्यालय द्वारा यूनाइटेट नेशन यूनिवर्सिटी-इंस्टीटयूट ऑफ एडवांस स्टडी (यूएनयू-आईएएस), कन्वेन्शन ऑन बायोलोजिकल डाइवरसिटी(सीबीडी), आईसीएलईआई- लोकल गवरर्नमेंट फॉर सस्टेनबलिटी एवं म.प्र. राज्य जैव विविधिता बोर्ड के सहयोग से 17 मई से 22 मई 2012 के मध्य आयोजित किया गया।
स्टूडियो में 50 छात्रों समेत 12 संकाय व भोपाल क्षेत्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने सहभागिता दर्ज की। ग्लोबल स्टूडियो - एलबीएसएपी एसपीए भोपाल 2012 का मुख्य उद्‌देश्य भोपाल शहर की जैव विविधता का अध्ययन एवं जैव विविधिता संरक्षण के लिये स्थानीय रणनीति और कार्य योजना का प्रस्ताव तैयार करना था। ग्लोबल स्टूडियो में जैव विविधता का संरक्षण और अनुवांशिक के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभ का उचित और न्यायसंगत जैविक विविधता के घटकों के सतत्‌ उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।