योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल की स्थापना भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ के रूप में सन् 2008 में की गई। योजना एवं वास्तुकला विद्यालय भोपाल को वर्ष 2014 में संसद द्वारा पारित अधिनियम द्वारा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया है। संस्थान देश को ऐसे योजनाकार एवं वास्तुकार देने के लिए प्रतिबद्ध है जो वैष्विक मानकों के अनुरूप भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण के विकास की चुनौतियों का सामना कर सके। यह संस्थान ’सृजनात्मकता के संस्थान’ के रूप में विकसित होगा जहॉं विद्यार्थियों, अनुसंधानकर्ताओं, प्राध्यापकों एवं समाज में निरीक्षण की भावना प्रबल होगी। योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, व्यापक अभिकल्पना के द्वारा सामाजिक समन्वय, संरक्षण के द्वारा सांस्कृतिक समन्वय एवं योजना तथा वास्तुकला शिक्षा के माध्यम से पर्यावरणीय समन्वय को बनाये रखने के लिए प्रयास करेगा ।

योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल का उद्देश्य:-

  • संस्थान को योजना एवं वास्तुकला क्षेत्र में स्नातक, स्नातकोत्तर, डॉक्टरेट एवं पोस्ट डॉक्टरेट स्तर के उत्कृष्ठ शिक्षा केन्द्र के रूप में विकसित करना ।
  • अनुसंधान एवं परामर्श को महत्व देते हुए योजना एवं वास्तुकला के क्षेत्र में एक राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान एवं विकास केंद्र के रूप में स्वयं को स्थापित करना ।
  • राष्ट्रीय स्तर के डाटा बेस सेंटर के रूप में अवस्थापन एवं आवास विकास योजनाओं को बनाने एवं लागू करने के संबंध में सरकार को सहयोग देना ।
  • संस्थान को एक नोडल केन्द्र के रूप में स्थापित करना जो कि सम्बन्धित क्षेत्र में दूसरे मध्य क्षेत्र में स्थित वास्तुकला एवं स्थानिक योजना संस्थानों की निगरानी कर सके ।
  • उत्कृष्ट संकाय संवर्ग की स्थापना करना जो योजना एवं वास्तुकला क्षेत्र में शिक्षण, अनुसंधान एवं परामर्श कार्य के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होंगे ।
  • मानव अवस्थापन के भौतिक विकास के लिए सरकार को अनुसंधित सूचना प्रदान करने के लिए एक सामाजिक उत्तरदायित्वता के संस्थान के रूप में विकसित होना ।