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सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली केंद्र (सीसीकेस)

योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल जो कि एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है एक जनादेश के साथ समाज को सार्वभौमिक अभिकल्पना के माध्यम से निर्वाह करता है, संरक्षण के माध्यम से संस्कृति को निर्वाह करता है एवं वास्तुकला, योजना एवं डिजाइन के अनुशासन के माध्यम से पर्यावरण को निर्वाह करता है। इसका उद्‌देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने, राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान और डेटाबेस केंद्र बनाने और सामाजिक रूप से जिम्मेदार संस्था जो सरकार को अनुसंधान एवं प्रतिक्रिया उपलब्ध कराने के लिये गुणवत्ता का केन्द्र स्थापित करना है।
संस्थान के जनादेश को जारी रखते हुए योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल ने सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली केंद्र प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा है। ज्ञान प्रणाली ने लोगों के प्रतिमान में मौजूदा विरासत को समझने की दिशा, विरासत स्थल का चिन्हांकन एवं समग्र समझ के प्रमुख स्थान व समय के दृष्टिकोण को विकसित किया है। यह भारत के संरक्षण परिदृश्य की दिशा में एक संरचनात्मक ढांचा तैयार करने तथा उत्तेजना और प्रोत्साहन के माध्यम से कठोर और नए तरीकों को विकसित करेगा। यह योजना एवं वास्तुकला विद्यालय, भोपाल में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करेगा।


उद्देश्य
  • सामाजिक और सांस्कृतिक जीविका के संरक्षण को समावेशी करने हेतु अभ्यास एवं बढ़ावा देना।
  • क्षेत्रीयता के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित प्रबंधन कौशल और भागीदारी संरक्षण प्रथाओं को आकार देना।
  • वैचारिक और दार्शनिक व्यवस्थाओं की सैद्धांतिक समझ एवं हस्तक्षेप और विभिन्न स्तरों पर इसके निहितार्थ संरक्षण के अभ्यास पर बराबर जोर बनाए रखना।
  • भारत के मध्य क्षेत्र में व्यापक सामग्री को विकसित करने और सभी संबंधित पक्षों के शोधकर्ताओं और संस्थाओं द्वारा संदर्भित संसाधन सामग्री के डेटाबेस को बनाए रखने हेतु अनुसंधान कार्य और विभिन्न विरासत घटकों के प्रलेखन का कार्य।
  • भारत में सांस्कृतिक संसाधनों के बहुअनुशासनिक क्षेत्र में संरक्षण के उपक्रम के लिये अभिनव तरीके को प्रोत्साहित करना।
  • तकनीकी मार्गदर्शन, नेतृत्व उपलब्ध कराने हेतु प्रकाशन का कार्य विशेषज्ञता के क्षेत्रों के लिये काफी हद तक योगदान हो सकता है।
  • संरक्षण के बदलते दायरे और विरासत की समझ में वर्तमान और नए उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान।
  • अनुसंधान और संरक्षण के क्षेत्र में विभिन्न पहलुओं के दस्तावेज और मौजूदा प्रथाओं के साथ लिंक स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कौशल और क्षमताओं को विकसित करना।
  • संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में जागरूकता प्रदान करना।
केन्द्र निम्नलिखित के माध्यम से अपने उद्‌देश्यों को प्राप्त करता हैः

विशेषज्ञों के मार्गदर्शन की उपलब्धता गैर सरकारी और स्वयं सेवी संगठनों, पेशेवर, सरकारी एजेंसियों, अनुसंधान संगठनों, शैक्षिक संस्थानों के लिये विशिष्ट संरक्षण परियोजनाओं की एक विस्तृत श्रंखला पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लिया जाता है। इसकी पहल खजुराहो के विरासती प्रभाव के आकलन हेतु कार्य कर की गई।

सरकारी एजेंसियों का परामर्श राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नीतिगत मामलों का संबंध विरासत प्रबंधन एवं समितियों की सेवा से संबंधित संरक्षण के विवादस्पद मुद्‌दों से है। इसकी पहल खजुराहो एवं आशापुरी के मंदिरों के विरासती प्रभाव के आकलन हेतु कार्य कर की गई।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ संबंध स्थापित करना एवं कार्यक्रमों, संयुक्त स्टूडियो एवं अनुसंधान परियोजनाओं को संचालित करना। इस प्रयास में एक छोटी सी पहल पहले से ही एनटीएनयू यूनिवर्सिटी, नार्वे, यूनिवर्सिटी ऑफ गंगटोक, स्वीडन, कार्डिफ यूनिवर्सिटी, यूके के साथ की गई है।

अधोसंरचना सुविधा का विकास मध्य भारत में अध्ययन हेतु डेटाबेस का एक नोडल केन्द्र बनना है। विदित हो कि एसपीए भोपाल प्रकाशित पुस्तकों, पत्रिकाओं और विभाग हेतु भविष्य में अप्रकाशित शोध भी पूरी तरह सुसज्जित संरक्षित प्रयोगशाला ऐतिहासिक निर्माण समाग्री के विश्लेषण का इस्तेमाल का विकास हो सकता है।

अल्प अवधि के पाठ्‌यक्रम, कार्यशालाएँ, सेमिनार का आयोजन, संबधित विषयों के साथ ही स्थानीय समुदाय और मीडिया के मध्य विचार विमर्श को प्रोत्साहन, छात्रों की बातचीत को प्रोत्साहन और संरक्षण में पेशेवरों के मध्य जागरूकता पैदा करना। एसपीए भोपाल संरक्षण एवं विरासतों पर की गई अन्य संस्थानों की गतिविधियों का सहयोग करने में हमेशा तत्पर रहता है। जैसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, पुरातत्व निदेशालय, कला, अभिलेखागार और संग्रहालय, मध्य प्रदेश सरकार, द्रोण फाउण्डेशन एवं संस्थान में अनुसंधान केन्द्रों के साथ संयुक्त कार्यक्रम।

शैक्षिक एवं पेशेवरों की सुविधाएं हेतु भवनों के सभी उपक्रम ऊपर उल्लेखित हैं। इनके एक भाग में, एसपीए भोपाल की आवश्यकता के उद्‌देश्य से सेंटर के बीच एक विंग 3 एवं 4 कर्मचारियों के साथ प्रारंभ किया जा सकता है जो परियोजना की रिपोर्ट की तैयारी हेतु प्रारंभ से ही लगातार जमीनी दिशा में डॉक्यूमेंटेशन के साथ कार्य करेगा एवं संरक्षण प्रक्रियाओं, मानकों और विशेष मास्टर प्लान की तैयारी करेगा।
इस केन्द्र का प्रमुख कार्य विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करना होता है। वह अपने स्वामित्व में संरचनाओं के संरक्षण के मुद्‌दों के समाधान के लिये विभिन्न सरकारी विभागों के बीच अंतर को पूरा करने के लिये सक्षम होगा।
ऐतिहासिक/पुरातात्विक महत्वपूर्ण संरचनाओं से संबंधित मुद्‌दों का हल जटिल है। वर्तमान दिनों में मौजूदा समस्याओं को हल करने हेतु प्रयासों पर बल दिया जा रहा है जो खातों के रूपांतरण में सहायक हो। इन बढ़ती हुई समस्याओं के उपरांत संरक्षण के उपायों को लागू कर रहे हैं एवं इसके बाद नुकसान एवं बनावट पर ध्यान दे रहे हैं। यह केन्द्र हृदय एवं अमृत जैसी परियोजनाओं/योजनाओं के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व को आगे बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र का एक भाग होगा।

डॉ. विशाखा कवाठेकर
प्रमुख,
सांस्कृतिक ज्ञान प्रणाली केन्द्र