प्रस्तुत कार्यक्रम :
डाक्टोरल (पीएच. डी.) कार्यक्रम :

संस्थान के शोध कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण जीविका की वर्तमान आवश्यकताओं को प्रोत्साहित करने हेतु स्वतंत्र और अंतः विषय के अनुसंधान पर जोर दिया गया है। ज्ञान के विस्तार को संतुलन बनाये रखने हेतु, यह कार्यक्रम एक अनुसंधान परिवेश उपलब्ध कराता है जिससे बस्तियों और निवास स्थान से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर मजबूत सैद्धांतिक स्तर एवं ज्ञान के दृष्टिकोण से समाधान होता है।

मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (अर्बन डिजाइन) :
भारतीय शहर अनियंत्रित व अस्तव्यस्त विकास के चलते, शहरी जीवन की गुणवत्ता ख्याति एवं संपत्ति की हानि हो रही है, दुर्भाग्य से शहरी रूप एवं संरचना में स्पष्टता एवं सटाव की कमी है। मास्टर प्रोग्राम का उद्देश्य शहरी जीवन को बढ़ावा देने वाली त्वरित आवश्यकताओं के विषय में बताना है। प्राथमिक ध्यान अभिनव डिजाइन दृष्टिकोण और सैद्धांतिक अनुसंधान का उपयोग हमारे शहरों को आकार देने में शहरी फार्म की भूमिका की जांच करने पर है। यह दो वर्ष का स्नातकोत्तर कार्यक्रम प्रमुखतः शहरी अभिकल्पना की मास्टर की डिग्री के लिए है।

मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (लेण्डस्केप) :
एस.पी.ए. भोपाल में लेण्डस्केप आर्किटेक्चर के मास्टर प्रोग्राम का उद्देश्य परिदृश्य वास्तुकला व्यवसाय में परम नेतृत्व हेतु छात्रों को शिक्षित करना है। इस मिशन को बौद्धिक एवं संवेदनशीलता के विकास और अभ्यास दोनों की आवश्यकता है। यह डिजाइन और अनुसंधान के माध्यम से पेशे में आ रही समस्या को हल करने हेतु छात्रों का द्वंद तैयार करता है और यह एक ध्यान केंद्रित कार्यक्रम है। कार्यक्रम निजी, सार्वजनिक, शैक्षणिक और अनुसंधान संगठनों में प्रवेश हेतु छात्रों को तैयार करता है। एक अंतः विषय व्यवस्था पर्यावरण के मुद्दों के समाधान में गंभीर और रचनात्मक सोच जानने के लिए तैयार की गई है। ताकि एसपीए भोपाल से भविष्य में लैंडस्केप आर्किटेक्ट स्नातक के अभ्यास निश्चित रूप से पर्यावरण नैतिकता, डिजाइन विकास, परियोजना प्रबंधन सहित पेशे से चिन्हित पहलुओं में बहुमुखी रूप विभिन्न स्तर पर संचार, उभरती प्रौद्योगिकियों, नैतिक आचरण, साथ ही अनुसंधान से संबंधित क्षेत्रों पर किया जायेगा।

परिदृश्य वास्तुकला की मास्टर डिग्री का प्रोग्राम अग्रणी, चार सेमेस्टर (दो वर्ष) की अवधि का है।

मास्टर ऑफ आर्किटेक्चर (संरक्षण) :
भारत समृद्ध प्रकृति एवं सांस्कृतिक विरासत का देश है। विरासत में भिन्नता भौगोलिक स्थानों, समय अवधि, भवन निर्माणकर्ता, स्थापत्य शैली, सांस्कृतिक विरासत के विभिन्न आकार एवं प्रकार, मौजूदा पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, पारंपरिक प्रथाओं में निरंतरता और निर्मित विरासत की विभिन्न श्रेणियों के प्रागैतिहासिक, एतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों और बड़े सांस्कृतिक क्षेत्रों के लिए एक अलग इमारत की वजह से है। इसके अलावा 3600 केन्द्रीय संरक्षित स्मारक, 5000 राज्य संरक्षित स्मारक की बड़ी संख्या विभिन्न धार्मिक संस्थाओं, संगठनों और मालिकों द्वारा संरक्षित हैं। एक योग्य पेशेवर संरक्षक की आवश्यकता को देखते हुए तकनीकी प्रगति की मांग है जो समाज को तेजी से बदल सके एवं साथ ही यह वर्तमान समाज में विरासत के अर्थ समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

एस.पी.ए. भोपाल भारत के केंद्र में स्थित दो विश्व घरोहर स्थलों के पास सांस्कृतिक परिदृश्य सहित विरासत का उपयोग करने हेतु एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। संरक्षण विरासत कार्यक्रम, अभ्यास के मानकों के उचित उपयोग के रखरखाव और प्रबंधन हेतु संरक्षण, प्रक्रिया और आवश्यक तकनीकों में सिद्धांत और दर्शन की दिशा में छात्रों को प्रशिक्षण में तैयार किया गया है। इस प्रशिक्षण में सूचित निर्णय लेने और कौशल और तकनीक के इस्तेमाल की सुविधा होगी।

मास्टर ऑफ प्लानिंग (शहरी एवं क्षेत्रीय नियोजन) :
भारत में बढ़ती हुई शहरी जनसंख्या के कारण बहुत तेज गति से प्राकृतिक संसाधनों की कमी, तनावपूर्ण काम की स्थिति, प्रदूषित वातावरण की समस्या उत्पन्न हुई है जिसके परिणास्वरूप सामाजिक सरंचना बदल रही है। विद्यालय में दो वर्षीय स्नातकोत्तर कार्यक्रम ‘‘मास्टर आफ प्लानिंग‘‘ का प्रमुख उद्देश्य पेशेवर योजनाकारों को बनाना है जो समुदाय की सहायता हेतु तत्पर होंगे।

मास्टर ऑफ प्लानिंग (पर्यावरण योजना) :
एस.पी.ए. भोपाल शैक्षणिक सत्र 2013-14 से पर्यावरणीय नियोजन में योजना कार्यक्रम (एमपीईपी) के एक नए मास्टर की शुरूआत की घोषणा की। पर्यावरण नियोजन एवं पर्यावरण योजनाकारों के बढ़ते महत्व को देखते हुए, एमपीईपी पाठ्यक्रम के रूप में पर्यावरणीय समस्या को समझने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से छात्रों को लेस बनाया गया है एमपीईपी पाठ्यक्रम आदेश और व्यावहारिकता उत्पन्न करने हेतु, एक पर्यावरणीय समस्या समझने हेतु, आदेश के सहमतीयोग्य एवं व्यवहारिक समाधान में सहसंबद्ध मुद्दों की जांच करने हेतु आवश्यक कौशल के साथ डिज़ाइन किया गया है। पाठ्यक्रम पर्यावरणीय नियोजन और प्रबंधन, पर्यावरण अर्थशास्त्र, पर्यावरण निगरानी, पर्यावरण नीतियों और कानून, पर्यावरण प्रभाव आकलन, प्राकृतिक प्रबंधन, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन आदि विषयों के प्रांरभ में सारणी तैयार कर विभिन्न पहलुओं की समझ विकसित करने हेतु प्रयास करेगा।

एमपीईपी पाठ्यक्रम में चार सेमेस्टर होंगे जिसके प्रत्येक सेमेस्टर में उपलब्ध कराई गई सैद्धांतिक सूचनाओं के आधार पर एक स्टूडियो अभ्यास होगा। प्रथम सेमेस्टर का उद्देश्य मानव बस्तियों को बनाने की योजना होगी जहां छात्रों को मानव बस्तियों की नींव से परिचय कराया जायेगा। सामान्य व्याख्यान सत्रों के अलावा, छात्रों को अनुसंधान परियोजनाओं, कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और अन्य ज्ञान के आदान प्रदान कार्यक्रम में शामिल होने हेतु अनुभव और सीखने के अपने डोमेन विस्तार करने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा।

बेचलर ऑफ आर्किटेक्चर (पंचवर्षीय डिग्री कार्यक्रम) :
विद्यालय चार्टर और मिशन के हिस्से के रूप में, विद्यालय के वास्तुकला विभाग एक जीवंत संस्कृतिक डिज़ाइन प्रदान कर रहा है। यह सुनिश्चित करना होगा कि स्नातक छात्र केवल वास्तुकला अभ्यास को ही मुख्य नहीं मानेंगे बल्कि अपने पेशे को भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान करने के लिए सक्षम होंगे। विद्यालय द्वारा एक संस्कृतिक ओपन स्टूडियो विकसित करने का प्रयास किया है। जिसमें सभी स्तरों पर छात्र एक दूसरे को कैसे नवीन विचारों को उत्पन्न और विकसित कर रहे हैं, से सीख सकते हैं, इस रूप में अच्छी तरह से स्वतंत्र और मूल अनुसंधान के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान का विकास गहराई से होगा।

बेचलर ऑफ प्लानिंग (चार वर्ष का डिग्री कार्यक्रम) :
74 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के बाद बाहरी स्थानीय निकायों में विकास कार्य शुरू करने के लिए सभी स्तरों पर योग्य योजनाकारों को बढ़ाया गया। बी. प्लान पाठ्यक्रम देश में योजना पेशेवरों की खाई पाटने के लिए एक प्रयास है। एक ऐसा देश जहां आजादी के बाद से शहरीकरण लगातार वृद्धि पर है और हाल के वर्षों में काफी तेजी से बढ़ रहा है। शहरीकरण के साथ आने वाली असंख्य समस्याओं से निपटने के लिये योजना पेशेवरों को प्रशिक्षण की आवश्यकता है।