प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्र एवं नेटवर्किंगः
सीएचसीआर, विचारों के मंथन एवं प्राथमिक अनुसंधान क्षेत्रों को चिन्हित करने हेतु संसाधनों के समूह के साथ विचार मंच का आयोजन करता है। यह सभी हितधारकों को (एसपीए के संकाय और छात्रों, उच्च शिक्षा के अन्य संस्थान, गैर सरकारी संगठन, सरकारी एजेंसी, उपभोक्ताओं, उपयोगकर्ताओं और सेवा प्रदाता) इन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को संबोधित करने के लिये जोड़ता है। केंद्र नियमित रूप से संबंधित क्षेत्रों पर विशेष व्याख्यान, कार्यशाला, सार्वजनिक प्रदर्शनी, सम्मेलन एवं जागरूकता अभियान का आयोजन करता है। हाल ही के दिनों में यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों जैसे आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया, नेशनल इंन्सटीटयूट ऑफ आर्थोपेडेकली हेण्डीकेप्ड, आरूषि, द्रोण, अबिलिटी अनलिमिटेड, यूनेस्को इत्यादि के सहयोग से विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
शिक्षा एवं प्रशिक्षण :
सीएचसीआर एक्ट एक संसाधन केन्द्र की तरह है जो स्थानीय, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निर्मित वातावरण में लोगों के केंद्रित अध्ययन को संबोधित कर शोध की सुविधा देता है। केन्द्र संबंधित विषयों में विशेष शैक्षणिक पाठ्‌यक्रम प्रदान करता है। तथा प्रशिक्षण कार्यशाला और प्रतियोगिताओं का आयोजन करता है। भारत में कुछ राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्व धरोहर स्थलों की खोज के लिये यूनीवर्सल डिजाइन, समावेशी डिजाइन, हेण्ड्‌स ऑन वर्कशाप के विषय पर और राष्ट्रीय छात्र डिजाइन प्रतियोगिताओं में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, केंद्र ने नेशनल इंस्टीटूट ऑफ डिजाइन में एक अंतरराष्ट्रीय एच्छिक पाठ्‌य विषय 'बुजुर्गों के लिए डिजाइन' पर वर्कशाप का आयोजन किया और बर्कले पुरस्कार के तहत आगामी वर्ष में वास्तुकला विभाग, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, संयुक्त राज्य अमेरिका के सहयोग से उज्जैन के पवित्र स्थल में सांस्कृतिक इंटरफेस के लिए यूनिवर्सल डिजाइन पर डिजाइन स्टूडियो का संचालन करेंगे।
अनुसंधान एवं अभिकल्पन विकासः
सीएचसीआर एसपीए भोपाल के संकाय एवं छात्रों की परियोजनाओं में चिन्हित प्राथमिक क्षेत्रों का प्रारंभ से ही समर्थन करता है। यह स्नातक, परास्नातक परियोजनाएं/स्टूडियो एवं पीएच डी विषयों पर अनुसंधान एवं प्रायोजित संकाय परियोजनाओं का सहयोग करता है। उक्त परियोजनाओं में से कुछ, आरुषि यूनिसेफ और यूनिवर्सल डिजाइन इंडिया प्रोजेक्ट, एनआईडी अहमदाबाद आदि के सहयोग से आंगनवाड़ी केन्द्रों में कम लागत के अक्षम अनुकूल शौचालय शामिल हैं। कुछ वर्तमान पीएचडी शोध में शामिल हैं, ''भारतीय बुजुर्ग के लिए वातावरण को अनुकूल बनाने हेतु वास्तुकला डिजाइन पर पुनर्विचार'', ''अवशेषो के साथ कार्यः स्थान, सामग्री, लोग, शहरी गरीबों की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय वास्तुकला की योजना बनाना आदि।
सीएचसीआर जानकारी साझा करने और संस्था के ज्ञान के विकास हेतु वास्तुकारों, इंजीनियरों, योजनाकारों, डिजाइनरों और अन्य हितधारकों, जो इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं के सहयोग से संबंधित विषयों पर प्रकाशन निकालता है। केन्द्र ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संदर्भित पत्रिका ''स्पैन्ड्रल'' ''सामाजिक सशक्तिकरण से सामाजिक समता'' विषय पर असहाय लोगों जैसे विकलांग, बच्चे व बुजुर्ग को संबोधित करते हुए प्रकाशित की है। सार्वभौमिक डिजाइन पर एक वार्षिक कैलेंडर भी संस्थान द्वारा प्रकाशित किया गया है जो यूनिवर्सल डिजाइन भारतीय सिद्धांतों एवं भारत के सभी डिजाइन संस्थान के लिए एक मासिक आवधिक प्रसार है। केंद्र एक गैर सरकारी संगठन आरुषि के सहयोग से हिंदी में बाधा मुक्त स्कूलों में चल चित्र के साथ उपयोगकर्ता के अनुकूल दिशा निर्देशों का विकास कर रहा है। सीएचसीआर के आने वाले अन्य प्रकाशनों में 'एकजुट मतभेद' समावेशी डिजाइन पर डिजाइन प्रतियोगिता के विजेता प्रविष्टियों पर आधारित है।